<एल्बम परिचय>
उन लोगों के लिए 'किम से-जोंग' का शांत सा दिलासा, जो आज भी प्यार की यादों को संजोए हुए अपनी गति से घूम रहे हैं [सौर मंडल]
<‘से-जोंग’ के शब्द>
एक ऐसा प्यार होता है, जो किसी भी भावना से परे, अब एक आदत बन चुका है।
सोकर उठने के बाद बिस्तर ठीक करना,
घर लौटते समय संदेश भेजना,
एक कान से निकाला हुआ ईयरफोन,
अलमारी में करीने से रखे बर्तनों के सेट,
ऑरेंज जूस,
सुहावने मौसम में हान नदी के किनारे टहलना,
हरा रंग लिए हुए आसमान,
हमेशा थोड़ा खुला रहने वाला बाथरूम का दरवाज़ा,
नाखून चबाना छोड़ देना... इत्यादि।
भले ही वह प्यार अपना केंद्र खो चुका हो, लेकिन आदतें हमेशा साथ रहती हैं।
क्या मैं उस प्यार से मुक्त हो सकती हूँ, जो अब मेरा हिस्सा बन चुका है?
उस प्यार के पास, जो मेरी धूप और मेरी पूरी दुनिया था,
मैं आज भी चंद्रमा बनकर, तारा बनकर उसकी कक्षा में घूम रही हूँ।
उन शब्दों को अकेले दोहराते हुए जो मैं कह नहीं पाई,
मैं आज भी दूर से घूम रही हूँ, घूम रही हूँ, घूम रही हूँ।
<‘जुकजे’ के शब्द>
मूल गीत के माहौल को यथासंभव बनाए रखते हुए, मैंने इस गीत की विशिष्ट उदासी को एक ऐसे अभिनेता के एकालाप (monologue) की तरह पेश करने की कोशिश की है, जिसने अभी-अभी अपनी कहानी सुनाना शुरू किया हो।
गीत के शब्दों के अर्थ और उनके बीच की सांसों की गहराई कहाँ तक पहुँचती है, यह मुझे अभी भी पूरी तरह से पता नहीं है, लेकिन यह एक ऐसी प्रक्रिया थी जिसमें मैं लगातार खुद से सवाल करता रहा कि 'क्या यह ऐसी ध्वनि होगी? क्या यह ऐसा प्रवाह होगा?'
मैंने ध्वनिक वाद्ययंत्रों (acoustic instruments) के माध्यम से सूर्य की रोशनी में चमकते ग्रहों की आवाज़ को व्यक्त करने का प्रयास किया है, और मैं चाहता हूँ कि आप इसे सुनते समय से-जोंग जी की सांसों के साथ तालमेल महसूस करें।
[क्रेडिट]
मूल कलाकार: सुंग सी-क्यंग
गीत: कांग सुंग-वोन
संगीत: कांग सुंग-वोन
व्यवस्थित (Arranged by): जुकजे